*आजीविका को मजबूत करने हेतु, लघु वन उपज पर दिया गया विषेश प्रशिक्षण*
मोहला
वन-आधारित आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत लघु वनोपज (एमएफपी) पर क्षेत्र-विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन 02 फरवरी 2026 से 03 फरवरी 2026 तक लोक शक्ति भवन, मोहला में किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भावसर फाउंडेशन द्वारा रैम्प (Raising and Accelerating MSME Performance) योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के सहयोग से आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वन पर आश्रित समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ करना एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाना रहा। इसके अंतर्गत प्रतिभागियों को लघु वनोपज के वैज्ञानिक एवं सतत संग्रहण, प्राथमिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा सुरक्षित भंडारण से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों द्वारा बताया गया कि वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है, जिससे बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके।
कार्यक्रम में कटाई उपरांत होने वाले नुकसान को कम करने, गुणवत्ता नियंत्रण तथा प्रसंस्करण के आधुनिक तरीकों पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही वन-आधारित आजीविका से जुड़े समुदायों—विशेषकर महिलाओं एवं युवाओं—की आय बढ़ाने के अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उद्यमिता विकास, बाजार संपर्क, ब्रांडिंग एवं संस्थागत सहयोग तंत्र की जानकारी भी दी गई, जिससे वे लघु वनोपज आधारित सूक्ष्म उद्यमों की संभावनाओं को पहचान सकें और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकें। संवादात्मक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए एवं व्यावहारिक समस्याओं के समाधान पर सार्थक चर्चा हुई।
कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारी जे. एल. मंडावी एवं जितेंद्र नेताम की विशेष उपस्थिति रही, जिन्होंने प्रशिक्षणार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें नवीन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके अतिरिक्त कुटुंब एफपीओ के प्रतिनिधि योगेश अंबादे भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे और एफपीओ के माध्यम से बाजार से जुड़ने के लाभों पर प्रकाश डाला।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। कार्यक्रम ने एमएमएसी के अंतर्गत क्षेत्र में सतत, समावेशी एवं वन-संवर्धन आधारित आजीविका विकास की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार किया है, जिससे आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।