*ग्रीन पार्क क्रिकेट स्टेडियम अंबागढ़ चौकी में एक दिवसीय प्रवचन एवं समस्या निवारण शिविर का किया गया आयोजन*
मोहला
अंबागढ़ चौकी में उमड़ा आस्था का सागर, छत्तीसगढ़ में घर-वापसी का बड़ा आयोजनः रामानंदाचार्य नरेन्द्राचार्य के सान्निध्य में 200 परिवारों का पुनः प्रवेश, जगद्गुरु श्रीमद रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य जी के दिव्य प्रवचन से हजारों श्रद्धालु हुए भावविभोर
अंबागढ़ चौकी ग्रीन पार्क क्रिकेट स्टेडियम, अंबागढ़ चौकी में 17 फरवरी को रामानंद संप्रदाय, भक्त सेवा मंडल छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य (पीठाधीश्वर रामानंदाचार्य दक्षिण पीठ, नाणीजधाम, महाराष्ट्र) के एक दिवसीय प्रवचन, दर्शन, समस्या मार्गदर्शन एवं दीक्षा समारोह में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु इस महामंगल आयोजन में सम्मिलित हुए और दिव्य दर्शन, आध्यात्मिक मार्गदर्शन तथा दीक्षा का लाभ प्राप्त किया। अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी प्रवचन में जगद्गुरु ने तीन सरल सूत्रों का आह्वान किया,
जगद्गुरु ने संतुलित जीवन के लिए तीन सरल सूत्र बताए हैं प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट अपने इष्टदेव की एकाग्र भक्ति स्वप्र में भी किसी का बुरा न सोचना एवं "तुम जियो और दूसरों को जीवन दो। उन्होंने कहा कि "मनुष्य के अंतरमन और बहिरमन एकाग्र नहीं होने के वजह से मनुष्य स्वयं को दुःख से घिरा हुआ पाता है। मनुष्य के मन का स्वाभाविक गुण है चंचल होना यानी एकाग्र न होना। इसका चंचल गुण बार-बार हमें हमारे लक्ष्यों से विमुख करता रहता है। मनुष्य का मन उसको भावनाओं और कामनाओं के जाल में बांधकर भांति-भांति के कार्य करवाता है। हमारा मन हमारे शरीर रूपी रथ का सारथी होता है। इसका जिस ओर मन करता है वह उधर ही इसको ले जाता है। इसमें प्रायः गलत राह भी पकड़ ली जाती है। इसलिए अंतरमन और बहिरमन को एकाग्र करना बहुत आवश्यक है, और यह दोनों मन भक्ति से एक होती है जिसके वजह से मनुष्य की निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है, सही गलत की समझ बढ़ती है, प्रगलबता बढ़ती है, मन की चंचलता दूर होती है और संयम बढ़ता, कार्य को पूर्ण करने हेतु उत्साह और साहस बढ़ता है, भाव शुद्ध होते है आदि सकारात्मक परिणाम मनुष्य के जीवन में होते है। "। उनके शब्दों ने उपस्थित जनसमूह को आत्ममंथन और सकारात्मक जीवन की दिशा में प्रेरित किया। प्रवचन के दौरान बार-बार "जय सियाराम" के उद्घोष से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

समारोह में हजारों श्रद्धालुओं ने जगद्गुरु के दर्शन कर व्यक्तिगत समस्या मार्गदर्शन प्राप्त किया। जगद्गुरु श्री ने प्रत्येक व्यक्ति की समस्याओं को गंभीरता से सुनकर शास्त्रसम्मत एवं आध्यात्मिक-वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाधान प्रदान किया। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन के लिए अमूल्य अवसर बताया।
इस अवसर पर 200 परिवारों ने पुनः हिंदू धर्म में प्रवेश कर स्वधर्म स्वीकार किया। परिवारों ने वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन विधि और धार्मिक परंपराओं के मध्य हिंदू धर्म में पुनः प्रवेश किया। जगद्गुरु के सान्निध्य में इन परिवारों ने स्वधर्म स्वीकार करते हुए सनातन परंपरा के अनुसार आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपासक दीक्षा ग्रहण कर आध्यात्मिक जीवन पथ पर अग्रसर होने का संकल्प लिया। यह क्षण उपस्थित जनसमूह के लिए अत्यंत भावुक और ऐतिहासिक रहा।
समारोह में विशेष रूप अतिथि रूप में सच्चिदानंद उपासने प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, संजीव शाह उपस्थित रहे, जिन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बताया। आयोजन स्थल पर विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई थी, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम की सुव्यवस्थित व्यवस्था एवं अनुशासन ने सभी को प्रभावित किया।
जगद्गुरु ने अपने संदेश में कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में अध्यात्म और विज्ञान का संतुलन बनाए रखना चाहिए। यदि व्यक्ति अपने मन को संयमित कर सत्कर्म के मार्ग पर चले तो उसका जीवन सुख, शांति और आनंद से परिपूर्ण हो सकता है। उन्होंने "तुम जियो और दूसरों को जीवन दो" के संदेश को पुनः दोहराते हुए समाज में प्रेम, समरसता और सेवा की भावना को बढ़ाने का आह्वान किया।
जगद्गुरु की प्रेरणा से ज.न.म. संस्थान द्वारा देश-विदेश में अनेक सामाजिक उपक्रम संचालित किए जा रहे
हैं, जिनमें प्रमुख हैं -
निःशुल्क अन्नदान सेवा, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को के.जी. से स्रातक तक निःशुल्क शिक्षा, राष्ट्रीय राजमार्गों पर निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा, निःशुल्क रक्तदान शिविर, प्राकृतिक आपदाओं में सहायता, वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण, निःशुल्क वैद्यकीय सेवाएं। अब तक 1,53,343 से अधिक परिवारों की घर वापसी, 177 देहदान, 124 अवयव दान तथा जनवरी 2026 में मात्र 15 दिनों में 1,71,150 यूनिट रक्तदान जैसे ऐतिहासिक कार्य संपन्न हो चुके हैं।
समारोह में रामानंद संप्रदाय छत्तीसगढ़, उप पीठ प्रमुख घनश्याम माहेश्वरी, पीठ सदस्य सचिदानंद उपासने, पीठ सह प्रमुख मुन्नालाल मोटघरे, पीठ व्यवस्थापक प्रकाश अंगाड़ी सहित सभी जिलों के अध्यक्ष, निरीक्षक समस्त समिति, समस्त भक्तगण छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्य के भक्त श्रद्धालुगण उपस्थित थे। यह सम्पूर्ण समारोह रामानंद संप्रदाय, भक्त सेवा मंडल छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित किया गया था।