छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई में विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के अवसर पर दिनांक 30 अप्रैल 2026 को संगीतमय सुंदरकांड पाठ एवं आध्यात्मिक संगोष्ठी का गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
प्रेमचंद
छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई में विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के अवसर पर दिनांक 30 अप्रैल 2026 को संगीतमय सुंदरकांड पाठ एवं आध्यात्मिक संगोष्ठी का गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में निहित भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System - IKS) के मूल्यों को विद्यार्थियों तक प्रभावी रूप से पहुँचाना रहा। इसी क्रम में “विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय” विषय पर सारगर्भित व्याख्यान एवं संगीतात्मक प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया गया।
कार्यक्रम में रामचरितमानस के सुंदरकांड से प्रसंगों को लेकर यह प्रतिपादित किया गया कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक जीवन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं नैतिक मूल्यों का भी सशक्त आधार है। विद्यार्थियों को बताया गया कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में वैज्ञानिक सोच के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक चेतना का संतुलन आवश्यक है, जो कि NEP के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है।
भक्ति संगीत जैसे “वीर हनुमाना अति बलवाना” तथा “श्री राम जानकी बैठे हैं सीने में” की प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों को समर्पण, साहस, अनुशासन एवं सकारात्मकता के मूल्यों से परिचित कराया गया। हनुमान जी के चरित्र के उदाहरणों द्वारा यह समझाया गया कि ज्ञान, शक्ति और विनम्रता का संतुलित विकास ही वास्तविक सफलता का आधार है। साथ ही, भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में आत्म-नियंत्रण, कर्तव्यपरायणता एवं राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर विशेष बल दिया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अरुण अरोरा ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों में समग्र विकास (Holistic Development), नैतिकता एवं भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता का समावेश अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास हेतु उपयोगी बताया।
प्रभारी कुलसचिव डॉ. अमित राजपूत तथा शिक्षण विभाग के प्रभारी निदेशक प्रोफेसर पंकज मिश्रा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित न होकर जीवन मूल्यों, आचरण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना है, जिसे भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से सशक्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिक, प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक रहा। अंत में सभी उपस्थितजनों ने इस आयोजन को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणास्रोत बताते हुए इसकी सराहना की।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग की सहायक प्राध्यापक वंदना चंद्राकर एवं शेषनारायण साहू ने समन्वयक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।